
योगेश मिश्रा और उनकी पत्नी प्रतीची ने आत्मघाती कदम क्यों उठाया, यह सवाल अभी बना हुआ है। हालांकि ऑफिस से मिले सुसाइड नोट में पांच पेजों में भावुक करने वाली बातें लिखीं हैं। प्रतीची ने पिता को परेशान करते भाई-भाभी को कठघरे में खड़ा किया है। मां और कॉलोनी वासियों को धन्यवाद तक दिया है। सुसाइड नोट का टाइटल लिखने के लिए प्रिंट आउट निकाला गया। इसे फाइल पर चिपकाया। इसके बाद पांच पेजों पर पेन से सुसाइड नोट लिखकर फाइल में रखा गया। पुलिस ने बताया कि सुसाइड नोट के पहले पेज में ऊपर की तरफ जय महाकाल, एक और दो पेजेस लिखा है। इसके बाद लिखा कि मैं योगेश मिश्रा और मेरी पत्नी प्रतीची मिश्रा, हम दोनों यह घोषणा करते हैं कि हम दोनों ने आपसी सहमति से (बिना किसी दबाव के) सामूहिक आत्महत्या करने का निर्णय लिया है। इसके लिए हम दोनों ही व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हैं। हम दोनों को अपने परिवार या रिश्तेदार या किसी अन्य से कोई दबाव या उत्पीड़न या समस्या नहीं है। इस सामूहिक आत्महत्या के लिए किसी भी आदमी के खिलाफ किसी भी रूप में कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं की जाए, क्योंकि यह हम दोनों का ही अंतिम निर्णय है।
इन लोगों ने पिताजी को कई दिन से बंद कर रखा था
और हां यदि हो सके तो मेरे ससुर या मेरे (प्रतीची) पिताजी एनपी दुबे को न्याय दिलवाने की कृपा करें, जो कि मेेरी सास या मेरी (प्रतीची) मां विमला दुबे के देहांत के बाद अकेले मकान नंबर दीप नगर, खंदारी में रहते हैं। इनका पुत्र एवं पुत्र वधू पिताजी के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। क्योंकि जब 13 जून को मैं प्रतीची दोपहर में बच्चों के साथ पिताजी से मिलने गई तो इन लोगों ने पिताजी को कई दिनों से बंद कर रखा था।
पुलिस बुलाई फिर भी डैडी से नहीं मिलने दिया
दूसरे पेज पर लिखा कि मैं (प्रतीची) अपने दोनों बच्चों के साथ डैडी से मिलना चाहती थी, लेकिन इन लोगों ने मुझे गंदी-गंदी गालियां दीं और पागल आदि कहा। बिना मिले अपने घर के बाहर से भगा दिया। मैंने डायल 112 को इसकी शिकायत की। पुलिस पहुंची, लेकिन भाई ने पुलिस को मैनेज कर लिया। मुझे बिना मिले ही भगा दिया गया, जिसे दीप नगर वासियों ने देखा। इस सब के साक्षी हमारे ऑटो चालक भी हैं। उनका ऑटो नंबर और संख्या भी लिखी है। इसके बाद दीप नगर नहीं आने के बारे में समय-समय पर कहलवाया जाता रहा।
डैडी की सुरक्षा की व्यवस्था करने की कृपा करें
इन सब बातों से मेरा मन बहुत दुखी हुआ और है। ये दोनों लोग डैडी के साथ कभी भी कुछ भी कर सकते हैं। अत: हमारा निवेदन है कि डैडी की सुरक्षा की व्यवस्था करने की कृपा करें। ऊपर लिखा गया एक-एक शब्द सही है। हम दोनों की एक-एक शब्द लिखने की आपसी सहमति है। अंत में एक बार फिर इस सामूहिक आत्महत्या के लिए हम दोनों स्वयं जिम्मेदार हैं।
कॉलोनी वासियों के प्रति आभार
तीसरे पेज पर लिखा कि सभी कॉलोनी वासियों को सहृदय नमस्कार। मारुति एन्क्लेव में 21 साल अपनाने के लिए मैं आप सभी निवासियों, बड़ों, मित्रों, भाभी, बच्चों, आदरणीय लोगों को मैं अपने दिल से शुक्रिया और आभार और धन्यवाद व्यक्त करता हूं। मुझे यहां यह कहना चाहिए या नहीं, लेकिन जरूरी है इसलिए यहां व्यक्त कर रहा हूं कि कुछ लोगों में भटकाव नजर आता है। भटकाव भगवान से प्यार करने से ही कम या खत्म हो सकता है। इसलिए सभी निवासी मंदिर मारुति नंदन मे जुड़कर एक होकर भगवान से प्यार करें। अपनी कॉलोनी में अच्छा माहौल बनाएं। इससे अधिक आनंद की अनुभूति होगी।
मां आपका कर्ज सौ जन्मों तक नहीं चुका सकूंगा
मम्मी आपका मैं और प्रतीची सदैव आभारी रहेंगे। आपने एक बच्चे को योगेश मिश्रा बनाने में जो प्यार, तपस्या और समर्पण किया, उसका कर्ज में सौ जन्मों में भी नहीं उतार सकूंगा। भगवान करे आप जैसी मां, बहन, बड़े भाई, भाभी और छोटे भाई हर परिवार को मिले।




